Pankaj Tripathi’s village house does not have TV even today, says – Babuji has not seen any of my films | पंकज त्रिपाठी बोले- मेरे गांव वाले घर में आज भी टीवी नहीं है, बाबूजी ने अभी तक मेरी एक भी फिल्म नहीं देखी

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10 मिनट पहले

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‘मिर्जापुर 2’ का दूसरा सीजन 23 अक्टूबर को रिलीज होगा।

‘मिर्जापुर 2’ में कालीन भैया का किरदार निभा रहे पंकज त्रिपाठी की मानें तो उनके गांव के घर में आज भी टीवी नहीं है। क्योंकि उनके पिता को टीवी और फिल्में देखना पसंद नहीं है। 44 वर्षीय अभिनेता एक इंटरव्यू के दौरान पिता के साथ अपने ताल्लुकात पर बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उनकी एक भी फिल्म नहीं देखी है।

‘बाबूजी के साथ ज्यादा कम्युनिकेशन नहीं है’

स्पॉटबॉय से बातचीत में पंकज ने कहा, “बाबूजी और मेरे बीच में बहुत ज्यादा कम्युनिकेशन नहीं है। मेरे जीवन में क्या चल रहा है, क्यों चल रहा है? वो बैठ के मुझसे बातें नहीं करते। न उन्होंने कभी मुझे रोका है। बचपन में जब मैंने कहा कि मैं ड्रामा कर रहा हूं या मुझे लड़की का पार्ट करना है तो उन्होंने मुझे कभी नहीं रोका। जब मैंने कहा कि मैं ड्रामा स्कूल जा रहा हूं दिल्ली, तब भी उन्होंने बस इतना ही पूछा कि तुम्हारी नौकरी तो लग जाएगी? और मैंने कहा था कि हां लग जाएगी।”

‘मिर्जापुर के बारे में उन्हें कोई आइडिया नहीं’

पंकज ने इंटरव्यू में आगे कहा, “मिर्जापुर सीरीज क्या है? उन्हें (बाबूजी को) आइडिया भी नहीं होगा। उन्हें पता है कि मैं फिल्में करता हूं। जब मैं जाता हूं तो बस इतना पूछते हैं कि तुम्हारा सब ठीक है न? तो मैं बोल देता हूं हां सब ठीक है।”

‘मेरी कोई भी फिल्म थिएटर में नहीं देखी’

बकौल पंकज, “आज तक उन्होंने मेरी कोई फिल्म थिएटर में नहीं देखी है। कभी-कभार किसी ने दिखा दिए तो लैपटॉप या टैबलेट पर कुछ सीन देख लिए। वो टीवी नहीं देखते हैं। उन्हें पसंद नहीं है। मेरे गांव वाले घर में आज भी टीवी नहीं है। मैंने कई बार कहा कि टीवी लगवा देता हूं, कम से कम मेरी फिल्में देख लेना। लेकिन मां और बाबूजी ने बोला नहीं चाहिए।”

गोपालगंज बिहार के रहने वाले हैं पंकज

पंकज त्रिपाठी गोपालगंज, बिहार के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम पंडित बनारस त्रिपाठी और मां का नाम हिमवंती देवी है। चार भाई-बहनों में वे सबसे छोटे हैं। पंकज ने 2004 में फिल्म ‘रन’ में छोटा सा रोल कर बॉलीवुड में कदम रखा था। हालांकि, उन्हें पहचान 2012 में फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से मिली।



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